एशियाई खेल विशेष : प्रदर्शन सुधरा पर श्रेष्ठता के लिए करनी होगी कड़ी मेहनत

दिल्ली। खेलरत्न, सं : Time, 11:20, PM.
निश्चित रुप से इंडोनेशिया में आयोजित हुए एशियाई खेल में भारत ने इतिहास बदलते हुए अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इससे पहले 1951 में दिल्ली में आयोजित पहले एशियाई खेल में देश के खिलाड़ियों ने उम्दा प्रदर्शन कर एशिया की खेल शक्ति के रुप में खुद को साबित किया था, लेकिन हमें अभी भी खेल में श्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। हम सिर्फ 1951 एशियाई खेल से 2018 एशियाई खेल की तुलना कर अपनी श्रेष्ठता नहीं साबित कर सकते, क्योंकि दोनों एशियाई खेलों में कई अंतर हैं। जिन्हें जानना देश के सभी खेलप्रेमियों के लिए जरुरी है। 15 स्वर्ण पदक जीतकर हम अपनी पीठ थपथपा सकते हैं, लेकिन खेल में हमें श्रेष्ठ बनने के लिए कई ठोस उपाय करने होंगे। इसके लिए सरकार को खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएं जुटानी होगी।

फाइल फोटो

1951 एशियाई खेल में 11 देशों के 489 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। भारतीय दल से भी करीब 80 खिलाड़ियों ने दमखम दिखाया था। पहले एशियाई खेल में आठ खेलों की विभिन्न स्पर्धाओं में खिलाड़ियों ने दमखम दिखाया था, लेकिन इस 2018 एशियाई खेल में भारत से ही 572 खिलाड़ियों ने 40 खेलों की विभिन्न स्पर्धाओं में भाग लिया। पहले एशियाई खेल में एथलेटिक्स स्पर्धा में अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा है, जिसे इंडोनेशिया में हम नहीं दोहरा पाए। खिलाड़ियों और खेल स्पर्धाओं में 5 गुना से भी अधिक की बढ़ोत्तरी के बाद भी पदकों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ है। जो देश में खेल की दयनीय स्थिति को दोहराता है। खेल के विकास के लिए नीति निर्धारकों को इन पहलुओं पर गंभीरता से सोचना होगा। इंडोनिशया में हुए एशियाई खेल भारत का अब तक का दूसरा सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा है।

2018 के मुकाबले हम 1951 एशियाई खेल में बेहतर रहे
-1951 में 15 स्वर्ण, 16 रजत और 20 कांस्य पदक जीतकर जापान के बाद भारत ने दूसरा स्थान हासिल किया था

-2018 में 15 स्वर्ण सहित 69 पदक जीतकर आठवें स्थान पर रहे

-एथलेटिक्स स्पर्धाओं में सबसे अधिक 10 स्वर्ण, 12 रजत और 3 कांस्य पदक जीते जो अबतक के एशियाई खेल का श्रेष्ठ प्रदर्शन है

-फुटबॉल में स्वर्ण पदक जीता, जबकि 2018 में भाग लेने का भी मौका नहीं मिला

-1951 में एक खेल से औसतन दो स्वर्ण पदक झटके, लेकिन 2018 में यह एक स्वर्ण पदक के एक तिहाई से भी कम है।

-1951 में तैराकी, डाइविंग में दो स्वर्ण सहित 10 पदक झटके, लेकिन इस बार एक पदक भी नहीं मिला

-1951 में प्रत्येक खिलाड़ी को औसतन करीब एक पदक मिला, इस बार यह संख्या एक पदक के एक चौथाई से भी कम है

-1951 में भारत की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी बावजूद इसके उम्दा प्रदर्शन किया

-2018 में भारत एक महाशक्ति के रूप में है, बावजूद 15 स्वर्ण से आगे नहीं बढ़ पाए

-हमसे कम खिलाड़ियों वाले देशों ने 2018 में भारत के मुकाबले अधिक स्वर्ण झटके

1951 में विभिन्न खेलों में स्वर्ण पदक
एथलेटिक्टस : 10, डाइविंग : 2, फुटबॉल : 1, तैराकी : 1, वाटर पोलो : 1,

2018 में विभिन्न खेलों में स्वर्ण पदक
एथलेटिक्स : 7, ब्रिज : 1, निशानेबाजी : 2, कुश्ती : 2, बॉक्सिंग : 1, रोइंग : 1, टेनिस : 1,

2018 में इन खेलों में बेहतर हुए
सेपक टेकरा, ब्रिज, महिला निशानेबाजी, महिला कुश्ती, टेबल टेनिस,

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