विपरीत परिस्थितियों से पार पाकर बर्षा ने बास्केटबॉल में बनाया मुकाम

नोएडा। खेलरत्न, सं : Time, 10:00, PM.
प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को मात देकर अंक बटोरना और दूसरी टीम के खिलाड़ियों को अंक बटोरने से रोकना बर्षा को खूब आता है। बास्केटबॉल कोर्ट पर उनकी फुर्ती भी देखने लायक है। यही कारण है कि उनका चयन अंडर-14 गौतमबुद्ध नगर के लिए किया गया और उन्होंने राज्य प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा भी प्रदर्शित की। लेकिन यहां तक पहुंचने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी। बावजूद इसके बर्षा सिकदार ने कभी हार नहीं मानी। इस खिलाड़ी के पिता और मां रेहड़ी पर पान बेचकर घर का गुजर बसर करते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद बर्षा ने जिला बास्केटबॉल टीम में जगह बनाने में सफल रही। एक सप्ताह पहले बरेली में हुई प्रदेश अंडर-14 प्रतियोगिता में जिले की टीम चैंपियन भी बनी।

बर्षा सिकदार

गेझा की ड्रिबल एकेडमी में खेल की बारीकियां सीख रही यह खिलाड़ी नेशनल मिशन स्कूल की छात्रा है। ड्रिबल एकेडमी के सामने ही वर्षा का परिवार किराये पर रहता है। तीन बहनों में एक बर्षा तीन साल पहले ड्रिबल एकेडमी में बास्केटबॉल देखने आई थी। वह भी खेलने के लिए उत्सुक हुई। एकेडमी ने उसे निशुल्क प्रशिक्षण देना शुरू किया। शुरू में खानपान को लेकर उसे दिक्कत आई। एकेडमी संचालकों ने उनके परिवारवालों को समझाया। इसके बाद से वर्षा नियमित रूप से खेल का अभ्यास करने लगी। उसे खेलने के लिए जूते व अन्य सामान भी दिए गए। ट्रायल के बाद वह पहली बार जिला बास्केटबॉल टीम में चुनी गई। बरेली में हुई राज्य बास्केटबॉल प्रतियोगिता में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। जिले की टीम इलाहाबाद को हराकर प्रदेश चैंपियन बनी। इसमें बर्षा का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। वह नियमित रूप से बास्केटबॉल का अभ्यास कर रही हैं। उनका सपना भारतीय टीम से बास्केटबॉल खेलना है। एकेडमी के मुख्य प्रशिक्षक संजय गहलोत बताते हैं कि एक साल में वर्षा के खेल में काफी बदलाव आया है। वह जिले की टीम के लिए चुनी गई। प्रदेश की टीम में भी चुने जाने की संभावना है।

 

कपिल और विशाल शर्मा

कपिल और विशाल अंडर-19 टीम में
इसी एकेडमी से कपिल शर्मा और विशाल शर्मा का चयन जिले की अंडर-19 टीम के लिए किया गया है। दोनों मेरठ में खेली जा रही प्रदेश बास्केटबॉल चैंपियनशिप अंडर-19 में जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। दोनों खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। दोनों दो साल से अधिक समय से बास्केटबॉल का अभ्यास कर रहे हैं। इसी एकेडमी के सचिन यादव एनबीए जूनियर ग्लोबल टूर्नामेंट खेलने अमेरिका जाएंगे। उनका परिवार भी आर्थिक रूप से काफी कमजोर है। पिता निजी सुरक्षा एजेंसी में सुपरवाइजर हैं। आठ महीने पहले तक सचिन पेपर बेचने का काम करते थे।

 

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