एंटी डोपिंग की महत्ता को जानेंगे देश के 1000 खिलाड़ी और प्रशिक्षक

-डोपिंग पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन 30 जनवरी से
नई दिल्ली। खेलरत्न, सं :: Time, 11:00, PM.
एंटी डोपिंग की महत्ता को बताने के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन 30 जनवरी से दिल्ली के जनपथ स्थित डॉ. भीम राव अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में होगा। इसमें देशभर से 1000 से अधिक खिलाड़ी, प्रशिक्षक, कॉलेज स्कूलों में कार्यरत शारीरिक शिक्षक और खेल पत्रकार शामिल होंगे।
नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) भारत सरकार के खेलकूद एवं युवक कल्याण विभाग के सहयोग से फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया (पेफी) दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन करेगी। डॉ भीमराव अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर जनपथ पर 30 और 31 जनवरी को होने वाले कार्यक्रम में डोपिंग के विभिन्न पहलुओं पर विषय से जुड़े दिग्गज चर्चा करेंगे।

डोपिंग पर होने वाली राष्ट्रीय कांफ्रेस की विवरणिका का विमोचन करते नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी के महानिदेशक नवीन अग्रवाल और पेफी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. पियूष जैन

नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी के महानिदेशक नवीन अग्रवाल ने बुधवार को कॉन्फ्रेंस के ब्रोशर का अनावरण करते हुए कहा कि खेलों में बढ़ती हुई प्रतिबंधित दवाइयों के सेवन के खिलाफ यह सेमिनार खिलाड़ी और प्रशिक्षकों को जागरूक करेगी। जाने और अनजाने में खिलाड़ियों के द्वारा प्रतिबंधित दवाइयां लेने से न केवल उनके कैरियर पर प्रभाव पड़ता है साथ ही साथ उनके स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है। डा. अग्रवाल ने बताया कि नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) द्वारा पूरे देश में फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर जागरूकता अभियान का आयोजन किया जा रहा है।

इस अवसर पर पेफी के सचिव डॉ पीयूष जैन ने कहा कि विश्व खेल जगत में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और पदक जीतने के जुनून में खिलाड़ी डोपिंग के जरिए अपना शारीरिक दमखम बढ़ाते हैं और पकड़े जाने पर प्रतिबंधित कर दिए जाते है। कई बार खिलाड़ी बीमारी के दौरान जानकारी के अभाव में कुछ प्रतिबंधित दवाएं ले लेता है और डोपिंग में फंस जाता है। डा. जैन ने बताया की फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पेफी) समय-समय पर देश के विभिन्न राज्यों में और विश्वविद्यालयों में इस तरह के जागरूकता अभियान चलाती है जिससे कि हमारे युवा खिलाड़ी प्रतिबंधित दवाइयों के सेवन से बचें। खेलों में बढ़ते हुए मान सम्मान और पैसे के लिए कुछ खिलाड़ी जाने अनजाने में इस तरह की दवाइयों का सेवन करते हैं और पकड़े जाने पर उन पर 2 साल से लेकर 8 साल तक का प्रतिबंध लग जाता है और उनका पूरा कैरियर खराब हो जाता है इसलिए आज जरूरत इस बात की है के हमारे खिलाड़ियों को शुरुआत से ही इन दवाइयों के बारे में जानकारी दी जाए जिससे कि वह लोग इनका सेवन ना करें।

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