365 दिन नॉट आउट दिल्ली-एनसीआर के अंपायर

नोएडा। खेलरत्न, सं, Time, 1:00, PM.
बल्लेबाज लगातार एक, दो या तीन पारियों में नाबाद रहे होंगे, लेकिन दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) से जुड़े अंपायर 365 दिन नॉट आउट रहते हैं। यानि साल के प्रत्येक दिन (विशेष परिस्थितियों को छोड़कर) अंपायर किसी न किसी मैच के लिए मैदान पर होते हैं। एसएन दूबे मेमोरियल क्रिकेट टूर्नामेंट के अंपायरों ने अंपायरिंग के बारे में कई रोचक तथ्य बताए। जिसे खेलरत्न डॉट ओआरजी साझा कर रहा है।

डीडीसीए लीग में करीब 920 मुकाबले होते हैं। इसे 70 अंपायर कराते हैं। दिल्ली में 50 स्कोरर भी हैं। वहीं दिल्ली एनसीआर में अंपायरों की संख्या करीब 300 है। जो विभिन्न राज्यों के क्रिकेट संघ से जुड़े हुए हैं। दिल्ली एनसीआर में, गाजियाबाद, नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद जैसे महत्वपूर्ण शहरों में सबसे अधिक टूर्नामेंट का आयोजन होता है। एसएन दूबे मेमोरियल के डीडीसीए के अंपायर लेखराज सिंह, मैच रेफरी की भूमिका में हैं। इनके अलावा जोगिंदर सिंह और देवेंदर चौधरी अंपायरिंग करा रहे हैं। स्कोरर विशाल चौधरी हैं।

लेखराज सिंह बताते हैं कि वह डीडीसीए से जुड़े अंपायर हैं। साल में कम से कम डीडीसीए के 30 मैच में निर्णायक की भूमिका में होते हैं। ये संख्या कई बार 45 तक भी होती है। बावजूद इसके साल भर वह व्यस्त रहते हैं। दिल्ली एनसीआर में सालों भर टूर्नामेंट होते हैं। इससे एक दिन की भी छुट्टी लेना मुश्किल हो जाता है। अंपायरों को एक मैच के लिए 1500-1500 हजार रुपये फीस के रूप में मिलते हैं।

डीडीसीए से जुड़े अंपायर लेखराज सिंह, जोगिंदर सिंह, और देवेंदर चौधरी

दिल्ली एनसीआर के बाहर बढ़ी टूर्नामेंट की संख्या
दिल्ली-एनसीआर के अलावा इन अंपायरों के लिए उत्तराखंड भी बड़ा काम लेकर आता है। यहां टूर्नामेंट की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में दिल्ली एनसीआर में मैच नहीं होने की स्थिति में अंपायरों की मांग उत्तराखंड में रहती है। जिसमें डीडीसीए के अंपायर जाकर मैच का आयोजन करवाते हैं। वहीं मुरादाबाद, अलीगढ़ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी डीडीसीए के अंपायरों की मांग है।
डेनाइट टूर्नामेंट कम हुए

आमतौर पर दिल्ली एनसीआरा में क्रिकेट टूर्नामेंट की संख्या बढ़ी है, लेकिन डेनाइट क्रिकेट कम हुआ है। नहीं तो पहले कई अंपायर ऐसे थे, जो 24 घंटे में दो-दो मैच करवाते थे। दिन के मैच के अलावा डे-नाइट टूर्नामेंट में भी उन्हें मैच में अंपायर की भूमिका निभानी पड़ती थी। किसी भी टूर्नामेंट के आयोजन में पांच लोगों की टीम काम करती है। इसमें दो फिल्ड अंपायर, एक मैच रेफरी और दो स्कोरर या (एक रिजर्व अंपायर) की टीम काम करती है। जो प्रत्येक मैच दिशा और दशा तय करते हैं।

पांच दिनों की पढ़ाई के बाद होती है परीक्षा
डीडीसीए के अंपायर बनने के लिए 5 दिनों की क्लास कराई जाती है। इस क्लास के लिए अंपायर बनने वाले को आवेदन करना पड़ता है। क्लास के बाद उनकी परीक्षा ली जाती है। परीक्षा में पास होने वाले अंपायर को राज्य के अंदर होने वाली प्रतियोगिता में अंपायरिंग दी जाती है। अंपायरों की क्लास के लिए अंतरराष्ट्रीय अंपायर बुलाये जाते हैं। राज्य, लेवल वन, टू, थ्री, फोर, फाइव के अनुसार अंपायरों की स्थिति बदलती जाती है।

Leave a Reply