क्रिकेट के शहर में ज्योति ने हैंडबाल में रचा इतिहास

कानपुर । खेलरत्न, सं : Time, 10:00, PM.
कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर देने वाले शहर कानपुर ने हैंडबॉल का नया सितारा दिया है। एशियाई खेल की हैंडबॉल स्पर्धा में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर शहर का मान बढ़ाने वाली ज्योति शुक्ला के लिए इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था। विपरित परिस्थतियों को पार पाकर कानपुर की गलियों से एशियाई खेल तक का सफर तय किया। उनसे भविष्य में भी शहर को काफी उम्मीदें हैं।

पूरणा देवी कॉलेज में छात्राओं से मिलती ज्योति शुक्ला

 

ज्योति शुक्ला कानपुर का नया चमकता सितारा है। अभी हाल ही में जकार्ता में संपन्न हुए 18वें एशियाई खेल में भारतीय महिला हैंडबाल टीम में प्रतिनिधित्व किया। कानपुर के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी खिलाड़ी ने क्रिकेट को छोड़ कर अन्य किसी खेल में ऐसी उपलब्धि हासिल की हो। नगर के पूरणा देवी कॉलेज से पढ़ी ज्योति शुक्ला वर्तमान समय में गोरखपुर में सीनियर टीटीई है। जकार्ता में हुए मुकाबलों में भारतीय टीम ने मलेशिया को हराकर एकमात्र जीत हासिल कर नौवां स्थान हासिल किया। टीम कोई पदक नहीं ला सकी पर कानपुर के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। नगर के काका देव इलाके में रहने वाली ज्योति को मुफलिसी के दौर से निकलना पड़ा लेकिन तीन साल पहले रेलवे में नौकरी मिलने से परिस्थितियां सुधरी। मां मीरा देवी और पिता शिव शंकर शुक्ला को अपनी बेटी पर नाज है। बिना अच्छी सुविधाओं के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलकर उसने मां बाप और शहर का डंका बजाया है। जकार्ता से लौटने पर कानपुर में उसका जोरदार स्वागत हुआ था। सभी लोग शहर की बेटी की उपलब्धि पर ढोल की थाप नाच रहे थे।

एशियाई खेल के दौरान जाकार्ता में ज्योति शुक्ला

सुविधाएं मिले तो शहर से और प्रतिभाएं निकलेंगी
ज्योति का कहना है यदि और सुविधाएं मिले तो कानपुर से और प्रतिभाएं सामने उभरकर आयेंगी। अब उसका पूरा ध्यान जापान में होने वाली प्रतियोगिता पर है। इस प्रतियोगिता में भारत से उम्दा प्रदर्शन की उम्मीद है। इसके लिए वह प्रतिदिन कड़ी मेहनत कर रही हैं। ताकि बेहतर प्रदर्शन कर देश को जीत दिला सकें।

अपने परिवार और प्रशिक्षक के साथ ज्योति

पूरी सुविधा नहीं दे सके, फिर भी बेटी ने मान बढ़ाया
ज्योति शुक्ला के मापा-पिता के अनुसार वो अपनी बेटी को वो सुविधा नहीं दे सके जो उसे मिलनी चाहिए थी। उसने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया। उसके कानपुर के मुख्य कोच रजत दीक्षित और स्कूल के कोच अतुल मिश्रा का बहुत बड़ा योगदान है। जिन्होंने उसकी हर प्रकार से मदद की।

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