‘बेटी बचाने’ के लिए साढ़े चार साल की बेटी के साथ मैराथन करते हैं धर्मेश

नोएडा। खेलरत्न, सं, Time, 11:00, PM.
बेटियां शक्ति हैं। बोझ नहीं। भ्रूण हत्या पाप है। बेटियों को बचाने के लिए इन स्लोगन के साथ कई रैलियां, प्रदर्शनी हमने देखी होंगी, लेकिन जयपुर के मैराथन धावक धर्मेश वर्मा का बेटियों के उत्थान के लिए जागरुकता अभियान सबसे अलग और अहम है। वह हाफ मैराथन में अपनी बेटी को वॉकर पर धकेलते हुए दौड़ते हैं। अब तक वह चार हाफ मैराथन पूरा कर चुके हैं। दौड़ के साथ बेटियों केा बचाने का उनका अभियान अनूठा है। 32 वर्षीय यह धावक मार्च में होने वाली 55 किलोमीटर की मैराथन में भी भाग लेंगे। इस मैराथन की थीम भी बेटी बचाओ और महिला सशक्तिकरण पर है।

अपनी बेटी के साथ मैराथन करते धर्मेश

जयपुर में पेट शॉप चलाने वाले धर्मेश वर्मा मूलरूप से गुजरात के हैं। उनकी साढ़े चार साल की दो बेटियां आरना और मिष्टी हैं। विभिन्नदौड़ प्रतियोगिताओं में वह बारी बारी से बेटियों को वाकर पर बैठाकर दौड़ते हैं। उनके जागरुकता अभियान का यह अनूठा सफर 5 साल पहले जयपुर में हुई हाफ मैराथन से शुरू हुआ था। अगले वर्ष उनकी दौड़ रोक दी गई | परिवार चलाने के लिए कुछ कठिन परिस्थितियों के चलते वे एकदम टूट चूके थे। लेकिन 2009 में पिंक सिटी मैराथन जयपुर में 50 किमी अल्ट्रा दौड़ 7 घंटे में पूरी की। धर्मेश अब रनैक्स स्पोर्ट्स ग्रुप द्वारा 11मार्च 2018 को करवाई जा रही टैक सीटी मैराथन(ए रन फॉर वुमेन सेफ्टी) नामक रेस में 65 किली मीटर की मैराथन में भाग लेंगे। इसमें वह आखिरी के 15 किलोमीटर अपनी बेटी के साथ दौड़ेंगे। इस रेस के अंबेसडर भी हैं। फरवरी 2017 में वह नई दिल्ली हॉफ मैराथन बेटी आरना के साथ 2 घंटे 3 मिनट में पूरी की। इसमें उन्होंने 21.097 किमी की दूरी पूरी की। धर्मेश बताते हैं कि बेटियां किसी से कम नहीं होती। वह मेरे लिए शक्ति हैं। देश और समाज मजबूत करने में उनका अहम योगदान है। इसलिए मैं अपनी बेटी को हमेशा दौड़ में अपने साथ रखता हूं।

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