अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में 11 गोल बचाकर विजय बने बेस्ट गोलकीपर

नोएडा। खेलरत्न, सं : Time, 10:00, PM.
शहर के दिव्यांग फुटबॉलर विजय शर्मा ने केन्या में खेली गई अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग (पैरा एंप्यूटी) फुटबॉल चैंपियनशिप में 11 गोल बचाकर बेस्ट गोलकीपर का तमगा हासिल किया। वह केन्या के साथ हुई सीरीज के एक मुकाबले में वह मैन ऑफ द मैच बने। प्रतियोगिता 21 मई को नैरोबी में समाप्त हुई। भारतीय टीम ने केन्या से तीन मैचों की सीरीज खेली।

विजय शर्मा

पहले मुकाबले में केन्या ने भारतीय टीम को 3-0 से हरा दिया। इसके बाद भारतीय टीम ने 2-1, और 3-2 से लगातार दो मैच जीतकर सीरीज अपने नाम किया। टीम में गोलकीपर की भूमिका निभा रहे विजय ने प्रतिद्वंद्वी टीम के कई हमलों को नाकाम कर दिया। उन्होंने तीन मैचों में कम से कम 11 गोल बचाए। इससे पहले भी भारतीय टीम से खेलते हुए विजय बेस्ट गोलकीपर बन चुके हैं। दो साल से भारतीय पैरा एंपुटी टीम का प्रतिनिधित्व कर रहा यह खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर का क्रिकेटर भी है। दिल्ली का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने कई राष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट प्रतियोगिता में प्रतिभा दिखाई है। विजय ने बताया कि पैरा एंपुटी फुटबॉल होने के बाद भी केन्या में काफी दर्शक यह सीरीज देखने आए। वहां फुटबॉल को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। दर्शकों में केन्या में रहने वाले भारतीय भी थे।

भारत वापस लौटने पर विजय का स्वागत करते स्थानीय लोग

शाकाहारी भोजन के लिए मेल किया
भारतीय टीम में विजय शर्मा इकलौता शाकाहारी खिलाड़ी थे। ऐसे में उन्हें केन्या में थोड़ी परेशानी झेलनी पड़ी। लिहाजा भारतीय संघ ने विजय शर्मा के खाने को लेकर मेल भी किया था। ताकि उन्हें शाकाहारी खाना मिल सके। विजय बताते हैं कि खाने को लेकर थोड़ी दिक्कत थी। वहां प्रतिदिन गाजर का हलवा जरुर मिलता था। वहां ज्यादातर मांसाहारी खाने का चलन है।

 

छलेरा में लोगों ने स्वागत किया
विजय के भारत लौटने पर छलेरा के लोगों ने उनका स्वागत किया। ढोल नगाड़ों के साथ उन्हें घर तक ले गए। एंप्यूटी फुटबॉल में गांव का नाम रोशन करने वाले विजय को लोगों ने पूरे गांव में घुमाया। इस दौरान राजू चौहान, रवि चौहान, राधे सैनी, संदीप चौहान, सुनील पंडित, सुंदर सैनी, रविंद्र चौहान, राजेंद्र सैनी, कप्तान चौहान आदि मौजूद रहे।

 

बायां हाथ काटना पड़ा था
विजय का बायां हाथ करीब 27 साल पहले काटा गया था। उस दौरान वह सेक्टर-38ए में पेड़ से गिर गये थे। हाथ काफी चोटिल हो गया था। इलाज के बावजूद जख्म ठीक नहीं हुआ था। जिससे पूरे हाथ में संक्रमण फैल गया था। डॉक्टरों ने केहुनी के ऊपर के हिस्से को बचाने के लिए हाथ काटना ही आखिरी विकल्प बताया था।

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