बाधाओं को जीत सचिन यादव ने जूनियर एनबीए ग्लोबल बास्केटबॉल में जगह बनाई

नोएडा। खेलरत्न, सं : Time, 10:00, PM.
सात महीने पहले तक घर-घर अखबार पहुंचाने वाले सचिन यादव जूनियर एनबीए ग्लोबल बास्केटबॉल चैंपियनशिप खेलेंगे। उन्होंने जिंदगी में आने वाली बाधाओं को जीत दर्ज कर यह उपलब्धि प्राप्त की है। विपरित परिस्थितियों में दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर सपनों को पूरा करने वाले सचिन को अब जिंदगी में सुधार आने की उम्मीद है। साथ ही परिवारवालों को भी उनसे भविष्य में काफी आशाएं हैं। सचिन ने बेहतर प्रदर्शन कर भारत की अंडर-14 टीम में जगह बनाई। एनबीए वर्ल्ड जूनियर अंडर-14 बॉस्केटबॉल चैंपियनशिप 6 अगस्त से अमेरिका के ओरलैंडो में शुरू होगी। इस खिलाड़ी को इस मुकाम तक पहुंचाने में गेझा गांव की ड्रिबल एकेडमी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

सचिन यादव

गेझा गांव में किराए के मकान में रहने वाले सचिन यादव सात महीने पहले तक अपने भाई के साथ घर-घर अखबार देने में मदद करते थे। सात सदस्यीय परिवार में सचिन के पिता की ही नियमित आय थी। उनके पिता लक्ष्मीकांत यादव एक निजी सुरक्षा एजेंसी में पहले गार्ड थे अब सुपरवाइजर हैं, लेकिन बेटे को एक बेहतर खिलाड़ी के रूप में देखने का सपना भी संजोया। परिवार को आर्थिक मजबूती देने के लिए सचिन अपने भाइयों के साथ काम करने लगे। मूल रूप से देवरिया के लक्ष्मीपुर बाजार का यह परिवार अब भी आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। गेझा के ही नेशनल स्कूल में दसवीं का छात्र सचिन एक साल पहले भी इस टूर्नामेंट में भाग ले चुके हैं। सचिन के पिता लक्ष्मीकांत बताते हैं कि इंसान का काम कर्म करना है। फल देने वाला तो भगवान है। ऐसे में सचिन ने कड़ी मेहनत के बल पर अपना मुकाम पाया। भविष्य में भी उन्हें सफलता मिलेगी। हमें उससे काफी उम्मीदें हैं। मैंने सपने ममें भी नहीं सोचा था कि सचिन एक दिन अमेरिका खेलने जाएगा।

अपने प्रशिक्षक संजय गहलोत के साथ सचिन

ड्रिबल एकेडमी में 1500 से अधिक जरुरतमंद खिलाड़ी निशुल्क प्रशिक्षण लेते हैं
ड्रिबल एकेडमी नोएडा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश में 1500 जरुरतमंद खिलाड़ियों को निशुल्क बास्केटबॉल का प्रशिक्षण दे रही है। इसके संस्थापक प्रद्युत वेलोटी अमेरिका से पढा़ई कर जब भारत वापस आए तो उन्होंने गरीब बच्चों के लिए नोएडा के गेझा में इस एकेडमी की शुरुआत की। नेशनल स्कूल के मालिक रणवीर लोहिया ने करीब छह साल पहले एकेडमी के लिए निशुल्क जगह दी । इसके बाद एकेडमी से ऐसे बच्चों को जोड़ा गया, जिसके अभिभावक रेहड़ी पर सामान बेचने, सिलाई करने आदि काम करते थे। एकेडमी के मुख्य प्रशिक्षक संजय गहलोत बताते हैं कि जब सचिन एकेडमी से जुड़ा तब तक वह खेल के नाम पर सिर्फ क्रिकेट को जानता था। ये लोग गांव में कंचे खेला करते थे।

अपने परिवार के साथ सचिन यादव

एनबीए जूनियर चैंपियनशिप बास्केटबॉल के बड़े टूर्नामेंट में शुमार
एनबीए चैंपियनशिप बास्केटबॉल की सबसे बड़ी प्रोफेशनल बस्केटबॉल लीग है। इसके तहत सीनियर और जूनियर प्रतियोगिताएं आयोजित होती है। 6 जून 1946 में बास्केटबॉल एसोसिएशन ऑफ अमेरिका की स्थापना की गई। जिसका नाम बदलकर 1949 में नेशनल बास्केटबॉल एकेडमी कर दिया गया। जूनियर एनबीए ग्लोबल बास्केटबॉल प्रतियोगिता में विश्वभर से 32 टीमें भाग लेती हैं। इसमें 16 लड़के और 16 लड़कियों की टीम होती है। इसके लिए एनबीए ही विभिन्न देशों में जाकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ट्रायल के बाद खिलाड़ियों का चयन करती है। जिन्हें ग्लोबल टूर्नामेंट में खेलने का मौका मिलता है। टूर्नामेंट में चयनित खिलाड़ियों को आने-जाने, रहने और खानपान की सेवाएं टूर्नामेंट के दौरान निशुल्क दी जाती हैं। जूनियर ग्लोबल प्रतियोगिता में अमेरिका की नॉर्थइस्ट, सेंट्रल, मिडवेस्ट, मिड अटलांटिक, वेस्ट, साउथ, साउथईस्ट व नॉर्थ इस्ट की टीमें भाग लेंगी। इन टीमों के अलावा कनाडा, लैटिन अमेरिका, यूरोप, मिडल इस्ट, चीन, मैक्सिको, अफ्रीका, इंडिया व एशिया पैसेफिक की टीमें खेलती हैं।

 

जन्म प्रमाण पत्र देर से बनने पर भारत में ट्रायल देने में मुश्किल
सचिन का जन्म प्रमाण पत्र पिछले साल बना है। ऐसे में भारतीय बास्केटबॉल संघ से जुड़े टूर्नामेंट के ट्रायल में सचिन को भाग लेने से रोका जा रहा है, क्योंकि सचिन की उम्र वर्तमान में 14 साल है और एक साल पहले उनका जन्म प्रमाण पत्र बना। जबकि नियमों के अनुसार पांच साल की उम्र से पहले ही यह प्रमाण पत्र बनना चाहिए था। ऐसे में पिछले साल वह ट्रायल नहीं दे पाए। अब मेडिकल जांच करवाने के बाद ही उनकी उम्र निर्धारित हो पाएगी।

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