पर्वतों के देवताओं की पूजा कर अर्जुन ने सफलता का आशीर्वाद लिया 

विश्व की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा के बेस कैंप पर अर्जुन वाजपेई
नॉएडा : खेलरत्न. सं :
विश्व की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा फतह के लिए निकले शहर के अर्जुन वाजपई ने शुक्रवार को पर्वतों के देवताओं की पूजा कर सफलता का आशीर्वाद लिया. किसी भी चोटी पर चढ़ाई से पहले देवताओं की अनुमति लेने के लिए पूजा अर्चना को अनिवार्य मन जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूजा से पर्वतों के देवी देवता मुश्किल घड़ी  में आप के साथ होते हैं. अर्जुन मई के पहले सप्ताह में कंचनजंगा चोटी फतह कर सकते   हैं. शनिवार को मौसम साफ़ होने पर कैंप 1 की ओर रवाना हो सकते हैं.
कंचनजंगा की ऊंचाई 8586 मीटर है. अर्जुन धार्मिक मान्यताओं पर पूरी तरह आस्था रखते है. यही कारण  है कि  पूजा को विधि विधान के साथ  करते हैं. अर्जुन की धार्मिक आस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की वह  हमेशा अपनी जेब में हनुमान चालीसा रखते हैं. नियमित इसका पाठ भी करते हैं. अर्जुन बताते हैं कि  प्रकृति की शक्ति सबसे बड़ी है. इससे कोई भी नहीं जीत सकता. इस दुनिया को एक विशेष शक्ति चला रही है.   ऐसे में हमें उसका सम्मान करना  चाहिए.

पहली बार  दल का नेतृत्व कर रहे हैं

चोटी चढ़ाई के अभियान में विभिन्न देशों के 12   शामिल हैं. इसमें  भारतीय मूल के एकमात्र पर्वतारोही अर्जुन हैं. पहली बार वह अपने दल का नेतृत्व कर रहे हैं. इससे पहले शहर का यह पर्वतारोही 8000 मीटर से ऊंची 5  चोटियों पर चढ़ाई कर चुके हैं. अगर वह कंचनजंगा पर फतह करने में सफल होते हैं तो उनके नाम इस चोटी पर सबसे काम उम्र में चढ़ने का विश्व रिकॉर्ड होगा।

इससे पहले अर्जुन एवरेस्ट , मनासलु , ल्होत्से, चो यू , मकालू चोटी पर फतह कर कई रिकॉर्ड स्थापित कर चुके हैं. अर्जुन अगर इस चोटी पर चढ़ने में सफल होते हैं तो वह 8000 मीटर से ऊंची छह चोटिओं पर फतह करनेवाले पहले भारतीय होंगे. अर्जुन बताते हैं कि इस बार अभियान  के दौरान  हम एक वृत्तचित्र भी बना रहे हैं.  बेस कैंप तक ये लोग रहेंगे इसके बाद पर्वतारोही वीडियो शूट करेंगे, इसके लिए शेरपा को भी प्रशिक्षित किया गया है. टीम में स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी, नेपाल आदि देशों के पर्वतारोही हैं.
आपातकालीन स्थिति में टीम का बचाव और सटीक निर्देश देने का काम अर्जुन करेंगे
पहली बार अर्जुन पर्वतारोहण दल का नेतृत्व कर रहे हैं. ऐसे में उनके लिए यह अभियान काफी मायने रखता है. क्योंकि इन्हीके निर्देश पर आगे बढ़ना है. मौसम की जानकारी, खानपान, चढाई  का समय निर्धारण, शेरपाओं का प्रबंधन, आपातकालीन स्थिति में टीम का बचाव और सटीक निर्देश देने का काम अर्जुन करेंगे. कहीं न कहीं छोटी पर फतह की सफलता भी इनपर ही निर्भर करेगी. ऐसे में अन्य अभियानों की तुलना में यह अभियान अर्जुन के लिए अहम् होगा.
 पर्वतारोहण के लिहाज़ तीसरी सबसे दुर्गम चोटी है कंचनजंगा 
यह चोटी चढ़ाई के लिहाज़ से तीसरी सबसे खतरनाक चोटी है. इस छोटी पर 187 पर्वतारोही ने चढ़ाई की या प्रयास किया।   इसमें से 40 की मौत हो गई. के-2 , अन्नपूर्णा के बाद कंचनजंगा पर फतह करना सबसे मुश्किल है. लिहाज़ा अर्जुन के लिए इसपर सफलतापूर्वक चढ़ाई करना मुश्किलों से भरा होगा. नुकीली चोटियां, खाई, बर्फभरी पर्वतारोहियों की मुश्किल बढ़ा सकती है , लेकिन  छोटी उम्र ही सही अर्जुन का पर्वतारोहण का लम्बा अनुभव   इस अभियान को पार  लगाने में काम आएगा .

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